यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ने मनाई अमन की दिवाली
October 29, 2019 • Bilal Ansari

क़नाट प्लेस के B ब्लॉक में यूनाइटेड अगेंस्ट हेट द्वारा “अमन की दिवाली” नाम से प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर UAH के सदस्यों ने फ़ुटपाथ पर रंगोली बनाई और राहगीरों के खीर बाँट कर आपसी भाईचारे और सदभाव का संदेश दिया। इस आयोजन की ख़ास बात यह रही कि इस दिवाली उत्सव के लिए जो खीर बनाई गयी थी वह UAH के सदस्य अपने अपने घर से बना कर लाए थे। इसकी वजह आयोजकों ने बताई कि उनका मक़सद सिर्फ़ खीर बाँटना नहीं बल्कि सभी समाज के लोगों को परिवार सहित दिवाली के उत्सव में शामिल करना था। जैसी कि हमारे देश की परंपरा रही है कि सभी धर्मों के लोग सभी त्योहार आपस में मिल जुलकर मनाते आए हैं और यह परंपरा कुछ कट्टरपंथी लोगों के कारण ख़त्म होती जा रही है और हर त्योहार सिर्फ़ एक धर्म के मानने वालों तक सीमित होते जा रहे हैं ! यूनाइटेड अगेंस्ट हिट की कोशिश रहती है कि उस सांझी विरासत को किसी भी क़ीमत पर बाक़ी रखा जाए। इस तरह का यह कोई पहला आयोजन नहीं था इससे पहले ईद के मौक़े पर भी UAH की टीम ने ठीक इसी तरह सड़कों पर खीर बाँटकर भाईचारे का संदेश दिया था। इस मौक़े पर दिल्ली के अलग अलग इलाक़ों से अलग अलग धर्म और ज़ाती के लोग अपने घरों से खीर लेकर आए और बड़े प्रेम भाव से लोगों को खीर बाँटी गयी। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित भाई मेहरबान कुरेशी ने कहा  कि वर्तमान परिवेश में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजित होना बेहद जरूरी है इस तरह के आयोजन कट्टरपंथी लोगों के मुंह पर तमाचा साबित होते हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद ने कहा यह जो मंजर आप देख रहे हैं यही हिंदुस्तान की असली पहचान है ! यह आयोजकों का बेहतरीन प्रयास है जिसकी ख़ूब प्रशंसा होनी चाहिए। नारायण सिंह ने कहा यहाँ का माहौल देख कर दिल ख़ुश हो गया, त्योहार मनाने का इससे अच्छा तरीक़ा नहीं हो सकता। UAH की मेम्बर निकिता चतुर्वेदी से जब पूछा गया कि आप त्योहार के दिन अपने परिवार को छोड़ कर यहाँ क्यूँ आयी हैं? तो उन्होंने कहा कि परिवार छोड़ कर नहीं बल्कि अपने बड़े परिवार के साथ बड़ी ख़ुशियाँ मानाने आयी हूँ। एक महिला राहगीर ने खीर खाते हुए कहां की यही हमारा देश है जहाँ हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सभी आपस में मिल कर रहते हैं ! और एक दूसरे का सुख दुःख साथ बाँटते हैं!जो कुछ नफ़रत की बातें है वो बस राजनीति वाले करते हैं ज़मीन पर हम सब एक हैं। एक सिख बुजुर्ग ने इस आयोजन की तारीफ़ करते हुए कहा जो लोग ऊपर सत्ता में बैठे हैं और नफ़रत फैलाने का काम कर रहे हैं उन्हें यहाँ आकर देखना चाहिए के हमारे बीच कितना प्यार और भाईचारा है। रंगोली सजाने के लिए UAH की सदस्या तमन्ना पंकज ने वहाँ आस पास मौजूद ग़रीब बच्चों को साथ ले कर रंगोली बनाई वहीं रंगोली में रंग भरने में एक छोटी मुस्लिम बच्ची आफ़िया ने मदद की। आयोजकों द्वारा वहाँ एक सेल्फ़ी बोर्ड भी लगाया गया था जिस पर एक संदेश लिखा था “नफ़रत नहीं प्यार चाहिए, जनता को अधिकार चाहिए” लोगों ने खीर खाने के बाद सेल्फ़ी बोर्ड पर अपनी फ़ोटो लीं और सोशल मीडिया पर साझा कीं। UAH के सदस्य ख़ालिद सैफ़ी ने कहा हमारी कोशिश है जिस तरह आज सोशल मीडिया का इस्तेमाल नफ़रत फैलाने और समाज को बाँटने के लिए किया जा रहा है हम उसी सोशल मीडिया का प्रयोग प्यार बाँटने और समाज को जोड़ने के लिए कर रहे हैं। दो घंटे से ज़्यादा चले इस आयोजन में 3000 से ज़्यादा लोगों को खीर खिलाई गयी और एक बहुत अच्छा संदेश दिया गया। खीर बाँटने में बहुत सारे युवाओं ने हिस्सा लिया जिस में ज़्यादातर  तादात लड़कियों की थी। वहाँ मौजूद सभी लोगों का मानना था कि इस तरह के आयोजन देश के विभिन्न हिस्सों में होने चाहिए