सन 2020 की ग्रहों की आकाशी कौंसिल और भविष्यफल
July 4, 2020 • Bilal Ansari

साल 2020 में ग्रहों की आकाशी कौंसिल ग्रह परिषद के 10 पदाधिकारों में से 5 अधिकार पद  सौम्य शुभ गृहों को एंव 5 पदाधिकार क्रूर ग्रहों को प्राप्त हुए हैं। राजा तथा धनेश (कोस्वामी) जैसे महत्वपूर्ण पद द्रीस्वभाव किंतु सौम्य ग्रह बुध को प्राप्त हुए है बुद्ध को कूटनीतिज्ञ चपल किंतु नपुंसक ग्रह भी माना जाता है मन्त्री का पद स्त्रीकारक ग्रह चंद्रमा को प्राप्त है। वर्षा मेघ फलों तथा सेना रक्षा के 3 महत्वपूर्ण अधिकार क्रूर ग्रह सूर्य को प्राप्त हुए हैं। धान्येश का अधिकार भी क्रूर ग्रह मंगल को प्राप्त हुआ है। सूर्य व मंगल दोनों पुरुष ग्रह माने जाते हैं । कृषि एवं धातुओं का अधिकार सौम्य शुभ एवं पुरुष ग्रह बृहस्पति गुरु को प्राप्त हुए है। ग्रहों के प्रस्तुत पद विभाजन के प्रभाव स्वरूप लेखक, अध्यापक, वकील, जज, बौद्धिक, एवं तकनीकी कार्यों से संबंधित लोग, वैद्यक, चिकित्सक लेखा-जोखा विज्ञान ज्योतिष तकनीकी कार्य उद्योग व्यापारवादी से संबंधित लोग विशेष रुप से लाभान्वित होंगे ।विश्व में अधिकांश राष्ट्राध्यक्ष पारस्परिक संबंधों में दोगली कूटनीति का प्रयोग करेंगे। राजनीति, सामाजिक, आर्थिक आदि सभी छेत्रों  में चालाकी, कपट एवं बौद्धिक, कुटनितियो का प्रयोग होने लगेगा ।यद्यपि भौतिक सुख-साधनों में उल्लेखनीय उन्नति होगी मन्त्री-चंद्रमा के प्रभावस्वरूप समाज एवं प्रसासन में स्त्रियों का महत्व एवं प्रभुत्व बड़ेगा । संपन्न एवं विशिष्ट वर्ग के लोगों के मध्य सुख-साधनों एवं धन का प्रसार बढ़ेगा। प्रत्येक छेत्र में उपभोग एवं व्यपारिक प्रवृति बड़ेगी। विवाहादि एवं अन्य राजनितिक, सामाजिक, व धार्मिक क्षेत्रों में प्रदर्शन एवं दिखावे कि प्रवत्ति बदेगी ।

उच्च स्थिति तथा शनि युक्त होकर लग्न भाव को नीच एवं शत्रु दृष्टि से देख रहे हैं । सप्तम भाव वैदेशिक संबंधों का भाव में मंगल शनि की स्थिति तथा भाग्यस्थ सूर्य चंद्र पर शनि की शत्रु तृतीय दृष्टि भी भारत एवं विश्व में तनाव एवं उलझनपूर्ण परिस्थितियों की ओर संकेत कर रही हैं कालसर्प योग भी बना हुआ है । ग्रहस्थिति आगामी वर्ष विश्व राजनीतिक मंच पर विशेष घटनाप्रद परिस्थितियों को लेकर आएगी । व
विश्व के अनेक विकसित एवं विकासशील देश अपनी सामरिक शक्ति बढ़ाने तथा प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से अपना वर्चस्व बनाने के लिए परमाणु एवं संहारक हथियारों का संग्रह करने में संलिप्त रहेंगे । वर्ष लग्न पर शनि मंगल की संयुक्त दृष्टियां तथा सूर्य पर शनि की शत्रु दृष्टि शुक्र पर गुरु की विशेष पंचम दृष्टि के प्रभाव स्वरूप दक्षिण एशिया के कुछ देशों में कहीं अग्निकांड भूकंप एवं हिंसक आंदोलन होने से अशांति फैलेगी। विश्वव्यापी आर्थिक छेत्रों में आर्थिक मंदी के कारण पाकिस्तान, ग्रीस, अफगानिस्तान, श्रीलंका, भारत, चीन, सहित अनेक विकासशील देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ जाएंगे राजनीतिक एवं आर्थिक छेत्रों में विश्व के प्रमुख देशों जैसे- अमेरिका, भारत, चीन,फ्रांस,ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा, आदि देशों के मध्य नए समीकरण बनेंगें।भारत अमरीका सहित विश्व के प्रमुख शक्तियों के सामने आतंकवाद से निपटना प्रमुख मुद्दा बना रहेगा । वर्ष प्रवेश कुंडली में कर्क लग्न उदित होने से पूर्वी देशों एवं पूर्वी प्रांतों में सुख समृद्धि दायक वातावरण रहेगा ।ऐश्वर्य तथा सुख साधनों में वृद्धि होगी एवं पूर्वी प्रदेश प्रगति पथ पर रहेंगे । परंतु उत्तरी दिशा के देशों एवं प्रदेशों उत्तरी यूरोप, कश्मीर में अशांति प्राकृतिक प्रकोपों से व्यापक जन धन हानि के संकेत हैं ।

मन्त्री चंद्र एवं धनेश भी बुध होने के कारण विभिन्न सौंदर्य प्रसाधनों तथा विभिन्न उपभोग्य वस्तुओं के उत्पादनों में विशेष वृद्धि होगी।  बढ़िया किस्म के वस्त्रों, हस़्ताशिल्प, हीरा मोती, आदि रत्नो़ के जौहरी एवं  सुवर्णकार, कलपुर्जों, एवं कृषि, अनाज करियाना आदि से संम्बंधित व्यापारी तथा पेट्रोल तेल डीजल, कागज ,सोना ,चांदी तांबा आदि धातुओं एवं भवन निर्माण  से संबंधित व्यवसायी  तथा सामान्य व्यापारी वर्ग भी लाभान्वित रहेगे।  चंद्र बुध के कारण मनोरोग ऊदर, स्नायु, रक्तचाप , मधुमेह, वात,पित एवं कफ सम्बन्धी गुप्त एवं पेचिदा रोग अधिक होंगे । लघु व्यापारी लोग आर्थिक उलक्षनों   के कारण परेशान रहेंगे । मेंघों बादलों वर्षा फलों तथा सेना का स्वामी सूर्य होने से अनुकूल एवं उपयोगी वर्षा की कमी रहे। आंधियां अधिक हो ।अधिकांश देश घातक परमाणु एवं न्यूक्लियर हथियारों के निर्माण में संलग्न होंगे। पहाड़ी क्षेत्रों में बेमौसमी भारी वर्षा से बाढ़ आदि का प्रकोप होगा।  लोगों में मानसिक एवं क्लिष्ट श्वास रोग अधिक होंगे।  यधपि कृषि, फल परमाणु  सौर ऊर्जा एवं सैन्य संसाधनों में विशेष उल्लेखनीय उन्नति होगी परंतु कुछ मुस्लिम बाहुल्य देशों के प्रमुख अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए विश्व के समृद्ध शक्तिशाली देशों से लोहा लेने से नहीं कतराएंगे । रसेश शनि होने से भी अनुकूल वर्षा की कमी रहे रसदार वस्तुएं जैसे- ईख ,दूध धी, तेल मक्खन खाण्ड  गुड आदि तथा पेयजल मैं कमी हो। इन सामान्य जनोपयोगी वस्तुओं के मूल्यों में जबरदस्त तेजी होने से लोगों में गहरा आक्रोश एवं असंतोष व्याप्त होगा लोगों में परस्पर प्रेम भाव एवं भाईचारे की विशेष कमी रहेगी । 
प्रमादी नामक संवत्सर के प्रभावस्वरूप भी सरकार की ओर से कठोर एवं अप्रिय निर्णय लिए जाएंगे। यधपि देशहित में लिए गए कठोर एवं क्लिष्ट  सरकारी  नियमों से सामान्य प्रजा में दुविधा, भय, विक्षोभ, एवं आक्रोश की भावनाएं रहेंगी ।