प्रधानमंत्री की योजना पर पानी फेर रही है डी डी ए
March 5, 2020 • Bilal Ansari

 

प्रधानमंत्री ने अख़बार के माध्यम से ऐलान किया था कि डी डी ए प्लॉट पर निजी बिल्डरों द्वारा बनाए गए व्यावसायिक दुकान एवम कार्यालय का मालिकाना हक बिना बिल्डर्स की अनुमति के दुकान के मालिक को दिया जाएगा जिसकी सरेआम प्राधिकरण धज्जियां उड़ा उड़ा रहा है।
इस योजना के तहत डी डी ए ने कहा था कि प्रार्थी अपना आवेदन पत्र उसकी वेबसाइट पर ऑनलाइन जमा करा सकते है । डी डी ए की वेबसाइट देखने के बाद कुछ रोचक तथ्य जो उभरकर सामने आए उससे तो यही पता चलता यह कार्य संभव ही नहीं है क्योंकि अधिकारियों ने बिना अध्ययन किए साइट को लॉन्च कर दिया है जिससे प्रधानमंत्री का ऐलान एक मजाक बनकर रह गया है ।
अब जरा शर्त पर गौर करते है 
पहली शर्त:- वहीं आवेदन देने के पात्र होंगे जिनके नाम पर एग्रीमेंट टू सेल या सेल डीड होगा जब की बिल्डरों ने स्पेस बायर एग्रीमेंट के तहत दुकान आदि बेचे है जो उपरोक्त श्रेणी में नहीं आता है ।
दूसरी शर्त:- आवेदनकर्ता को बिल्डिंग का स्वीकृत प्लान और कम्पलीशन सर्टिफिकेट जमा करने होंगे जो बिल्डर्स के पास होते हैं और बिल्डर्स ने किसी भी क्रेता को यह नहीं दिया है, मतलब फिर बॉल बिल्डर्स के हाथ में ।
तीसरी शर्त:- आवेदन बिल्डर्स के माध्यम से देने होंगे, फिर वही बात  इसके अलावा एफिडेविट, इंडेमिनिटी बॉन्ड आदि का भी सैंपल नहीं अपलोड नहीं किया गया ।
एन बातों का खुलासा तब हुआ जब प्रीत विहार कमर्शियल कॉम्प्लेक्स वेलफेयर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष एवम कार्यकारी सचिव बी एन झा अपने सहयोगी श्री राजेश महाजन के  ऑफिस का ऑनलाइन करने लगे और इसकी विसंगतियों को ठीक करने के लिए डी डी ए के कई चक्कर लगाए,
सच में कहा गया कि सरकार तो सिर्फ योजना लाती है , इसे अमल में लाना है या नहीं, इसका फैसला तो कर्मचारी और अधिकारी ही लेते हैं