करोना महामारी : अमूल्य ज्ञान कुंज
May 13, 2020 • Bilal Ansari

अब सभी जान गए हैं कि यह महामारी 17 मई तक जाने वाली नहीं,तब तक पीडित भी एक लाख के आस पास  होंगे ही , इसका असर साल दो साल तक  रहेगा ही।
 देश भर में आनन फानन में बिना पक्की तैयारी के कड़ाई से लॉकडाउन-1 थोपना और देश भर के आम जन द्वारा एक अनुशासित व जिम्मेदार नागरिक होने के नाते इसका अक्षरशः पालन करना प्रशंसनीय है उसके बाद लॉकडाउन- 2 और अब लॉकडाउन -3 तक बढाना भी सभी तमाम परेशानियों को झेलने के बावजूद एकजुट हो सरकारी दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं इस उम्मीद में कि अब 17 मई के बाद उनको सरकारी कुछ जायज और ढेर सारी नाजायज बंदिशों से छुटकारा मिल जाएगा। और उनकी जिन्दगी को पुनः पटरी पर लाने दिया जाएगा। 
पर जिस रफ्तार से कोरोना पीडितों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ रही है और सरकार की लाख सफल - असफल कोशिशों , लोगों के सब्र का बांध टूटने के कगार पर पहुंचने ,अर्थव्यवस्था के चरमराने और लगभग 50 करोड लोगों को बेरोजगारी  व भुखमरी के कगार पर पहुंचाने  के बाबजूद देशभर में कोरोना संक्रमण अपने पैर फैलाता जा रहा है, उससे नहीं लगता कि मोदी और उनकी भाजपा सरकार लॉकडाउन - 4 को  लम्बी अवधि तक थोपने में देरी करेगी। 
तीनों लॉकडाउन के थोपने का सुप्रभाव यह रहा कि पूरा देश इस बहुत खतरनाक महामारी के प्रति सजग और सावधान हो गया।इससे बचे रहने के लिए अति जरूरी व गैर जरूरी ( घंटे बजाना, पटाखे बाजी ,दीपक जलाना, कृतज्ञता के पुष्प बरसाना आदि को बर्दाश्त करना ) सरकारी दिशा निर्देशों को अपनाने की आम जन ने अपनी आदत में शुमार कर उसने एक जिम्मेदार नागरिक का परिचय दिया है। 
कल्पना कीजिए कि सरकार द्वारा यदि जबरन और आनन फानन में लॉकडाउन नहीं लगाया जाता तो क्या हो सकता था। इसके कितने गंभीर परिणाम देश को भुगतने पड सकते थे । 
एक विश्व विख्यात देशी वैज्ञानिक ने अपनी शोध में पाया कि यदि हमारे देश की सरकार अब तक तीनों लॉकडाउन नहीं लगाती तो 17 मई तक देश में करोना महामारी से पीड़ितों की संख्या 25 लाख और मृतकों की संख्या एक लाख 20 हजार से ऊपर होती । इसी वैज्ञानिक का अनुमान है कि तीसरे लॉकडाउन के अन्त 17 मई  तक गम्भीर रूप से संक्रमित लोगों की संख्या 60 हजार व मृतकों की संख्या 29 हजार से अधिक हो सकती है। आज तक 40 हजार गम्भीर रूप से संक्रमित और 2000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। कुल संक्रमित 65 हजार से अधिक हो चुके हैं। 
करोना महामारी का विश्व व्यापी जाल फैल चुका है। अभी तक इसका कोई भी सिद्ध इलाज सम्भव नहीं हो सका है। हजारों डाक्टर और लाखों की संख्या में उनके सहायक अपनी जान को जोखिम में डाल कर मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैंऔर सैकडों अपनी जान गंवा कर शहीद भी हो चुके हैं। कोविड -19 के लिए सिद्ध वैक्सीन जल्द से जल्द निर्मित करने लिए विशेषज्ञ अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। जब तक यह निर्मित नहीं होती तब तक विश्व सहित हमारे देश को धैर्य और साहस से सामना करना ही होगा 
 एक अन्य विशेषज्ञ का मानना है कि डिजीटल तकनीकी के इस युग में इस भयंकर महामारी से जल्द निपटने का हल ढूंढना लाजिमी हो गया है। सुपर कम्प्युटर की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और क्लाउड तकनीकी से यह संभव किया जा सकता है। पर इतना तय लगता है कि 2020 के अन्त या अधिक से अधिक 2021 के शुरूआत तक इसका सर्व  मान्यता प्राप्त ईलाज संभव हो पाएगा। तब तक हमे इस महामारी के आगोश में रहना ही होगा। 
बहुत से लोगों का मानना है कि लॉकडाउनों की इस लम्बी अवधि में समस्त जनमानस ने अपने ऊपर थोपी गई हर सरकारी  मुसीबत को चुपचाप सहन किया है। मोदी व उनकी भाजपा सरकार के निकम्मेपन , अकर्मण्यता,  उदासीनता और थोथी लफफाजियों को बर्दाश्त किया है, और कर रहे हैं , इस उम्मीद से कि 17 मई के बाद सरकार सब कुछ सामान्य कर देगी । 
परन्तु देश भर में अपनी लंबी तानाशाही का शौक पालने बाले मोदी और उनकी भाजपा सरकार लोगों पर जबरदस्ती बनाई गई इस पकड़ को लॉकडाउन को हटा कर आसानी से जाने देगी, असंभव लगता है ।
जरूरी हो गया है कि करोना महामारी से दीर्घकालीन निपटने के लिए सर्वसम्मत राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार किया जाए। अभी तक हम केवल एक लाख टेस्ट प्रतिदिन  कर पाने की क्षमता प्राप्त कर पाए हैं परन्तु  सिर्फ 60 हजार के आसपास ही टेस्ट किए जा रहे हैं,जो कि बहुत कम है। हमें शीघ्र इसको दुगना - पांच गुना तक प्रतिदिन बढाना ही होगा , आशा सेवकों ने इस हेतु सराहनीय कार्य किया है। जब इसकी वैक्सीन बना ली जाएगी या इसका विश्व  मानय इलाज संभव हो जाएगा , तब भी इनसे सेवकों की देश को बडे पैमाने पर आवश्यकता पडेगी, इस हेतु भी सरकार को अभी से तैयारी शुरू करनी होगी ।