कानपुर के सत्यग्रही 'गांधी' यानि वीररस कवि व समाजसेवक संजीबा के संघर्ष पूर्ण 24 वर्ष पूर्ण
September 10, 2020 • Bilal Ansari

कविगायकसंगीतकार,सामाजिक कार्यकर्त्ता  गरीबों की आवाज़ संजीबा के समाजसेवा के 24 वर्ष पूरे हुए

कानपुर। आज से 24 वर्षों पहले आज के सत्यग्रही 'गांधीयानि वीररस कवि  समाजसेवक संजीबा के घर के एक कमरे में एक किरायेदार के बेटे नेआत्महत्या कर ली थी,अपने सुसाइड नोट में उसने लिखा कि मैं भारत की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आत्महत्या कर रहा हूँ। इस घटना ने उनके जीवन को एक नई दिशा दे दिया,.बस उसकेबाद समाज की व्यवस्था बदलने के लिए कानपुर की सड़कों पर पहले क्रांतिकारी कविताओं की पर्चियां बाँटने लगे और फिर सड़कों पर नुक्कड़ नाटक खेलने लगेजिसके लिए नुक्कड़ नाटकखेलने के दौरान दर्जनों बार इन्हे जेल हथकड़ी,हवालात से गुजरना पड़ा। लेकिन उसके बाद भी वे रुके नहींनाटक के माध्यम से गरीबों की आवाज़ उठाने लगे, .सड़को पर अपनी कविता चित्रोंकी प्रदर्शनी लगाने लगे और आजकल 'संजीबानाम से यू टियूब चैनल शुरू किया और अपने गीतसंगीत और गायन के जरिये जनता की तकलीफो को और सरकार की गलत  नीतिओं कोउजागर करते हैं और जनता के सामाजिक जागरण और व्यवस्था में सुधार लाना की कोशिश करते है। जिसके लिए वर्ष 2012 में सीताराम जिंदल ग्रुप ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर दिल्ली में सम्मानित किया। संजीबा की नाटक मंडली में रिक्शा चालकसब्जी विक्रेताछोटे दुकानदार और दर्जी इत्यादि शामिल हैं।

          अपने 24 वर्षों के संघर्ष पूर्ण जीवन के बारे में संजीबा कहते है," मैंने जनता को जगानेउनके अधिकारों के बारे उन्हें बताने की कोशिश करता हूँ और करता रहूँगा। २५ वर्ष पूरे करने परपरम आनंद की अनुभूति हो रही है। मुझे ख़ुशी है कि मैंने पूरी ईमानदारी से गरीबों की आवाज़ को उठाया। कोई भी इस धोखे में ना रहे कि मैं जो भी कर रहा हूँकोई देख नहीं रहा है। चाहे नेताहो,अभिनेता होवकील होजज होअधिकारी हो या आम आदमी होएक अदृश्य शक्ति कहे,भगवान कहे या प्रकृति कहे आपके हर अच्छे या गलत कर्मों पर निगाह रखती है और जिसकाफल उनके बेटाबेटी - बीबी इत्यादि के रूप में देती है या उसका फल उनके पूरे परिवार भोगना पड़ता है।

                अपने भविष्य की योजना के बारे में संजीबा कहते है ," मैं गरीब जनता के लिए संघर्ष करता रहूँगा। ब्रम्हांड किया गया कोई भी काम व्यर्थ नहीं जाता है। हम जो मिलते हैउसकेपीछे भी कोई ना कोई उद्देश्य होता है। मैं आध्यात्मिक चीजों  जीवन के ऊपर रिसर्च का रहा हूँ।

 कानपुर। आज से २५ वर्षों पहले आज के सत्यग्रही 'गांधीयानि वीररस कवि  समाजसेवक संजीबा के घर के एक कमरे में एक किरायेदार के बेटे नेआत्महत्या कर ली थी,अपने सुसाइड नोट में उसने लिखा कि मैं भारत की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आत्महत्या कर रहा हूँ। इस घटना ने उनके जीवन को एक नई दिशा दे दिया,.बस उसकेबाद समाज की व्यवस्था बदलने के लिए कानपुर की सड़कों पर पहले क्रांतिकारी कविताओं की पर्चियां बाँटने लगे और फिर सड़कों पर नुक्कड़ नाटक खेलने लगेजिसके लिए नुक्कड़ नाटकखेलने के दौरान दर्जनों बार इन्हे जेल हथकड़ी,हवालात से गुजरना पड़ा। लेकिन उसके बाद भी वे रुके नहींनाटक के माध्यम से गरीबों की आवाज़ उठाने लगे, .सड़को पर अपनी कविता चित्रोंकी प्रदर्शनी लगाने लगे और आजकल 'संजीबानाम से यू टियूब चैनल शुरू किया और अपने गीतसंगीत और गायन के जरिये जनता की तकलीफो को और सरकार की गलत  नीतिओं कोउजागर करते हैं और जनता के सामाजिक जागरण और व्यवस्था में सुधार लाना की कोशिश करते है। जिसके लिए वर्ष 2012 में सीताराम जिंदल ग्रुप ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने में 25 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर दिल्ली में सम्मानित किया। संजीबा की नाटक मंडली में रिक्शा चालकसब्जी विक्रेताछोटे दुकानदार और दर्जी इत्यादि शामिल हैं।

          अपने २५ वर्षों के संघर्ष पूर्ण जीवन के बारे में संजीबा कहते है," मैंने जनता को जगानेउनके अधिकारों के बारे उन्हें बताने की कोशिश करता हूँ और करता रहूँगा। २५ वर्ष पूरे करने परपरम आनंद की अनुभूति हो रही है। मुझे ख़ुशी है कि मैंने पूरी ईमानदारी से गरीबों की आवाज़ को उठाया। कोई भी इस धोखे में ना रहे कि मैं जो भी कर रहा हूँकोई देख नहीं रहा है। चाहे नेताहो,अभिनेता होवकील होजज होअधिकारी हो या आम आदमी होएक अदृश्य शक्ति कहे,भगवान कहे या प्रकृति कहे आपके हर अच्छे या गलत कर्मों पर निगाह रखती है और जिसकाफल उनके बेटाबेटी - बीबी इत्यादि के रूप में देती है या उसका फल उनके पूरे परिवार भोगना पड़ता है।

                अपने भविष्य की योजना के बारे में संजीबा कहते है ," मैं गरीब जनता के लिए संघर्ष करता रहूँगा। ब्रम्हांड किया गया कोई भी काम व्यर्थ नहीं जाता है। हम जो मिलते हैउसकेपीछे भी कोई ना कोई उद्देश्य होता है। मैं आध्यात्मिक चीजों  जीवन के ऊपर रिसर्च का रहा हूँ।