हज़रत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में सभी धर्म के लोगों ने लगाई हाजि़री
October 23, 2019 • Bilal Ansari

नई दिल्ली। हज़रत निजामुद्दीन औलिया का 805 वां गुस्ल शरीफ अर्थात बर्ड डे सेलीब्रेशन बड़ी धूमधाम से सम्पन्न हुआ। पांच दिन तक चले इस विशेष कार्यक्रम में प्रतिदिन कव्वालियों की महफिल भी सजाई गई। दरगाह के चेयरमैन सैयद अफसर निज़ामी की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता दिलीप पांडे, सांसद संजय सिंह, बॉलीवुड सिंगर मोहित चौहान, कथक डांसर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, निगम पार्षद आले इक़बाल, कृष्णा नगर जि़ला कांग्रेस अध्यक्ष गुरचरन सिंह राजू, दिल्ली स्टेट हज कमेटी के पूर्व चेयरमैन डॉ- परवेज मियां, फे़स ग्रुप के चेयरमैन डॉ- मुश्ताक अंसारी, सीनियर टीवी जर्नालिस्ट मारूफ़ रज़ा आदि गणमान्य व्यक्तियों ने भी विशेष रूप से हज़रत जी के दरबार में हाजिरी दर्ज कराई।


इस मौके पर रॉक स्टार फिल्म में कुन फाया कुन कव्वाली पर एक्टिंग करने वाले कव्वाल चांद निज़ामी ब्रदर्स ने भी आज रंग है, अली मौला अली जैसी कई मशहूर कव्वालियां पेश की। बहुत ही खूबसूरत  दिलकश नजारा यहां देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों सहित विदेशी मुरीदों ने भी हजरत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में हाजिरी लगाई। 22 अक्टूबर समापन के दिन 9 बजे विशाल लंगर के बाद कव्वालियों के साथ जश्न आरम्भ हुआ। देर रात गुस्ल देने की रस्म अदा की गई, करीब 3 बजे रात को रस्म संदल व इत्र अदा की गई उसके बाद 4 बजे चादर पेश की गई तथा अंत में 5-40 बजे विशेष दुआ की गई। इस जश्न में सूफी संतों के अलावा अन्य धर्मों के मानने वाले भी भारी संख्या में नज़र आए। महिलाओं व युवाओं की संख्या भी कुछ कम नही थी। इस मौके पर सैयद अफ़सर निजामी ने कहा कि हजरत जी ने जो अमन और भाईचारे का संदेश दिया वह पूरे विश्व को पहुंचा,उन्हीं के पद चिन्हों पर चलकर हम समाज को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा हज़रत निजामुद्दीन औलिया साहब  के संदेश किसी धर्म विशेष के लिए नही थे ! उन्होंने इंसानियत की भलाई के लिए जीवन भर संघर्ष किया और अन्याय के विरूद्ध आवाज बुलंद की। इस अवसर पर लॉयन गुलफाम, पूर्व पार्षद ज़ाकिर खान, मौ- इलयास सैफी, नेहा शर्मा, सैयद फरहद अली, सलीम अंसारी, वाजिद अली, लता रानी शर्मा, मौ- अखलाक, नफीस काज़मी, शमीम खान, अमनजीत सिंह ,अताउल रहमान सैफी, हरचरन सिंह, गगन कत्याल, गुड्डू रॉक आदि भी विशेष रूप से मौजूद रहे।