दिल्ली के फकीर कांग्रेसी नेता रमेश दत्ता चल बसे
May 5, 2020 • K. S. Sharma

दिल्ली कांग्रेस के संभवत: आखिरी जमीनी नेता रमेश दत्ता नहीं रहे। वे 75 साल के थे।उनका रविवार को बतरा अस्पताल में निधन हो गया।
दिल्ली नगर निगम के लिए वे 1971 में पहली बार मिन्टो रोड से निर्वाचित हुए थे। तब उन्होंने जनसंघ के तपे हुए नेता नकुल भार्गव  को हराया था। उसके बाद वे मिन्टो रोड सीट से लगभग 30 सालों तक अपराजित रहे। वे दिल्ली के उपमहापौर भी रहे। हालांकि उनके राजनीतिक कद को उपमहापौर के पद से मापा नहीं जा सकता है। वे पिछले सात-आठ सालों से सक्रिय राजनीति की दुनिया से दूर थे।  लेकिन वे जनता के सुख-दुख से कभी दूर नहीं रहे। उनके चाहने वाले सारी दिल्ली में थे। वे मिन्टो रोड में एक टूटे-फूटे सरकारी घर में फकीरों की तरह से रहते थे। उन्होंने अपना कभी कुछ नहीं बनाया। वे अविवाहित थे। उनके माता-पिता और बड़े भाई, जो रंजीत होटल में सीनियर मैनेजर से बहुत पहले निधन हो गया था।
 
रमेश दत्ता को दिल्ली उनके काम और फक्कड़पन की वजह से जानती थी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा कहते थे कि दिल्ली कांग्रेस के पास रमेश दत्ता से बेहतर और सक्षम कोई दूसरा संगठन का व्यक्ति नहीं है।
इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी समेत सभी शिखर कांग्रेसी नेताओं की रैली में भीड़ जुटाने का काम रमेश दत्ता किया करते थे। वे  एक घंटे के नोटिस पर 400 लोग लेकर कहीं पहुंच सकते थे। उन्होंने नेहरु ब्रिगेड नाम की एक संस्था बनाई हुई थी। उसके कार्यकर्ता कांग्रेस की दिल्ली में होने वाली हरेक बड़ी रैली में मौजूद रहते थे।
 रमेश दत्ता के साथ लगभग  25 सालों से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता श्री मसरूर हसन सिद्दकी कहते हैं कि उन्होंने अपने पास आए किसी इंसान को निराश नहीं किया। वे हमेशा लोगों के साथ खड़े  रहते थे। वे कांग्रेस के 24 x7 के नेता थे। वे अपने को कभी नेता नहीं माते थे। वे हमेशा लोगों के किसी भी काम को कराने के लिए तैयार कहते थे।
 रमेशा दत्ता ने मिन्टो रोड में एक नेहरु हिल नाम का खूबसूरत पार्क भी बनवाया था। उन्होंने सैकड़ों नौजवानों की स्कूल और कॉलेजों की फीस  अपनी जेब से या किसी से उधार लेकर दी।  रमेश दत्ता गुजरें लंबे समय से सड़कों पर लगने वाली खानें की दूकानों से भोजन लेकर खाते थे।