बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गयी !
June 26, 2020 • कलीमुल हफ़ीज़

 

ये लिखते हुए मेरा हाथ काँप रहा है और ये बोलते हुए ज़बान लड़खड़ा रही है कि भाई रियाज़ुद्दीन हमें छोड़कर चले गये।
إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّـا إِلَيْهِ رَاجِعونَ
वो एक फर्द नहीं एक अंजुमन थे, उन्होने तालीम के मैदान में नुमायाँ काम अंजाम दिए। वो एक अच्छे प्रिंसपल के साथ ही ख़िदमत ए ख़ल्क के दीगर कामों में भी मुतहरिक थे। जदीद फ़ाउन्डेशन ट्रस्ट के एक मरकज़ी सुतून थे। ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट में सरगर्म थे। इन्किसारी और ख़ाकसारी उनका जौहर था, वो एक आइडियल इंसान थे। जदीद फ़ाउन्डेशन ट्रस्ट, ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट में उनके साथ काम करने का मोक़ा मिला। इसके अलावा उनकी सुसराल हमारे वतन यानी सहसवान की होने की वजह से भी हम एक दूसरे से मोहब्बत करते थे।
उनकी जुदाई मेरे लिए बहुत तक़लीफ देह है, अल्लाह त’आला उनकी मग़फ़िरत फ़रमाए और पसमान्दगान को सब्र ए जमील अता फ़रमाए। हमें उनके जैसा ख़ुलूस इनायत फ़रमाए। (आमीन