भारत रत्न से विभूषित पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का निधन राजनीति में एक अपूरणीय क्षति है-विनय सहस्त्रबुद्धे
September 1, 2020 • Shivani Choudhary
नई दिल्ली, 31 अगस्त। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न श्री प्रणब मुखर्जी के निधन की सूचना मिलते ही दिल्ली भाजपा कार्यालय में आज आयोजित “सेवा ही संगठन“ ई-बुक लॉन्च का कार्यक्रम स्थगित किया गया और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष  विनय सहस्त्रबुद्धे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व दिल्ली प्रभारी  श्याम जाजू, राष्ट्रीय मंत्री  सुनील देवधर, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष  आदेश गुप्ता, दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष  रामवीर सिंह बिधूड़ी, नई दिल्ली सांसद  मीनाक्षी लेखी, प्रदेश संगठन महामंत्री  सिद्धार्थन, प्रदेश उपाध्यक्ष  राजीव बब्बर, पूर्व उप महापौर  हर्ष मलहोत्रा सहित कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों ने मौन रखकर दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को श्रद्धांजलि दी।
 
 विनय सहस्त्रबुद्धे ने पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी के स्वर्गवास पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि भारत रत्न से विभूषित पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का निधन राजनीति में एक अपूरणीय क्षति है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर,विशाल दृष्टि अपनाते हुए और सच्ची जनतांत्रिक परंपराओं का पालन करते हुए उन्होंने राजनीति की। कांग्रेस पार्टी में श्री मुखर्जी ने कई पदों को विभूषित किया और जिन-जिन पदों पर वह रहे उन्होंने अपने काम से अमिट छाप छोड़ी। वित्त मंत्री के नाते, विदेश मंत्री के नाते उनका काम उल्लेखनीय रहा। भारत में ऐसे बहुत कम राजनेता है जो विचारक राजनीतिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कई किताबें भी लिखी और आर्थिक स्थिति को लेकर उनका अपना चिंतन था। बंगाल में रहते हुए जनतांत्रिक मूल्यों के साथ बैठकर खड़े रहने की आवश्यकता थी और वह करते हुए श्री मुखर्जी ने अपने विचारधारा के अनुरूप दशकों तक पार्टी की सेवा की। कुछ समय से अस्वस्थ रहने के बाद आज श्री मुखर्जी का निधन हो गया है और भाजपा उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करती है। 
 
 श्याम जाजू ने दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी को नम आंखों से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि श्री मुखर्जी ने अलग-अलग ओहदे पर रहे और देश का मान सम्मान बढ़ाया है। पार्टी का एक भी ओहदा नहीं बचा होगा जो उन्होंने सुशोभित नहीं किया। बतौर राष्ट्रपति उनका पूरा कार्यकाल देश के सामने है। दलगत राजनीति से ऊपर उठकर श्री मुखर्जी हमेशा अत्यंत शालीनता के साथ अन्य पार्टी के नेताओं से मिला करते थे। सभी राजनीतिक पार्टियों में उनका मित्र वर्ग था। अटल जी के कार्यकाल में भी कई ऐसे प्रसंग हुए जब पक्ष और विपक्ष में सलाह मशवरा की जरूरत होती थी, ऐसे समय में श्री मुखर्जी ने अपना योगदान दिया। उन्होंने अपने परिवार के साथ की तस्वीर को साझा करते हुए देश में संयुक्त परिवार की परिकल्पना का भी संदेश दिया। आखिरी क्षण तक वह सक्रिय रहे। आज वह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वह सदैव हमारी स्मृतियों में रहेंगे। 
 
श्री प्रणब मुखर्जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए  आदेश गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रवादी विचारों से ओतप्रोत श्री मुखर्जी देश की बातों पर सदैव ही खुलकर अपने विचार रखते थे। राष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने जनता के साथ जुड़कर बहुत से ऐसे काम किए, चाहे सामाजिक बुराई को खत्म करने की पहल हो या राष्ट्रवादी शक्तियों को आगे लाने की बात हो, उन्होंने प्रखरता के साथ इन विषयों को सबके सामने रखा। श्री मुखर्जी राजनेता तो थे और धार्मिक रूप से भी हमेशा नवरात्रि पर माता की भक्ति में लीन रहते थे। ओजस्वी व्यक्तित्व के धनी श्री मुखर्जी आज हमारे बीच नहीं है। उन्होंने कहा कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें और दुख की घड़ी में ईश्वर उनके परिवारजन को पीड़ा सहन करने की शक्ति दें।