अटल बिहारी जी की पुण्यतिथि पर मास्क और सेंट्रल जेल के वितरित
August 17, 2020 • Bilal Ansari

पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा स्थित पुलिस कॉलोनी थाना पार्क में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। ये आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी के निकट रहे उनके शिष्य भुवनेश सिंघल ने किया। इस अवसर पर अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पांजलि की गई व उनके दिवस को सेवा दिवस के रूप में मनाते हुए उपस्थित सभी लोगों को मास्क, सैनिटाईजर व आयुर्वेदिक काढ़ा वितरित किया गया। सिंघल ने इस अवसर पर अपने वक्तव्य में बताया कि उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी का सानिध्य अनेक बार प्राप्त हुआ है और वो अटल जी के अंतिम दिनों तक उनसे मिलने जाते रहे थे। उन्होने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ के अपने संस्मरण सुनाते हुए यह भी बताया कि उनको इस बात का गर्व है कि अटल जी के स्वर्गवास से ठीक कुछ दिनों पहले ही अटल बिहारी वाजपेयी को उनके जीवन का अंतिम सम्मान उन्होनें ही प्रदान किया था। साथ ही उन्होनें अटल बिहारी के साथ के अपने अनेक संस्मरणों को लोगों से साझा किया तथा अटल जी की प्रमुख कविताओं का भी पाठ किया और अटल जी पर लिखी अपनी पुस्तक ‘स्मृतियां अटल है’ में से प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति कोविंद, संघ प्रमुख मोहन भागवत व अटल जी के साथी रहे शिवकुमार व लाल जी टण्डन आदि के संस्मरणों के महत्वपूर्ण अंशो को सुनाया। उन्होनें बताया कि यह पुस्तक अटल जी पर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जिसमें अटल जी के पुराने साथियों से लेकर देश के शीर्षतम लोगों के संस्मरणों को तीन वर्षों की मेहनत के बाद प्राप्त किया गया और इस पुस्तक के रूप में तैयार किया गया था। वहीं उन्होनें अटल जी पर उनके द्वारा 2014 से निरंतर हर वर्ष संसद भवन में वैभव वेलफेयर सोसाईटी व अटल सम्मान समारोह ट्रस्ट के सहयोग से किये जाने वाले आयोजन ‘अटल सम्मान समारोह’ व राष्ट्रीय अटल कवि सम्मेलन’ के विषय में भी लोगों को बताया। वहीं उन्होनें अटल जी को शब्दांजलि देते हुए काव्यात्मक लहजे में कहा कि-
‘कूच से वो डरा नहीं, मौत से वो मरा नहीं, रग-रग हिन्दु बस, उसका परिचय था।
हार नहीं मानता था, रार नई ठानता था, काल के कपाल पर, लिखता विजय था।।
टूटे हुए तारों से ही, फूटे थे बासंती स्वर, वो घोर घटाओं वाली, घिरती प्रलय था।
मौत से वो ठानता था, गीत नया जानता था, इसीलिए बना वो तो, अटल अजय था।।’’

अंत में सिंघल ने लोगों से अटल बिहारी वाजपेयी जैसा बनने और उनके पदचिन्हों पर चलने का आग्रह भी किया और अपनी कविता के माध्यम से कहा कि-
‘राजनीति में अब डब्बे हैं रेल नहीं है।
पप्पू सारे पास हुए कोई फेल नहीं है।।
अटल बिहारी के गुण गाना सरल बहुत है।
अटल बिहारी सा बन जाना खेल नहीं है।।’

इस अवसर पर क्षेत्र के अन्य बुजुर्गों ने भी अपने विचार साझा किये। उपस्थित सभी लोगों को भुवनेश सिंघल ने कोरोना महामारी से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला आयुर्वेदिक काढ़ा वितरित किया तथा हैंडसैनेटाईजर व मास्क भी वितरित किये। इस अवसर पर विनोद कुमार, अमर झा, विपिन कुमार, मोहन सत्यपथी, वैभव सिंघल, दीपक गोयल, राघव गुप्ता, प्रवीण मित्तल, शावक व पवन कुमार झा सहित क्षेत्र के अनेक लोग उपस्थित थे।