ये आजादी अधूरी है
August 15, 2019 • Dr. Mushtaq Ansari

देश के जो वर्तमान हालात हैं उसे देखकर नहीं लगता कि देश पूर्ण रूप से स्वतंत्र है। प्रधानमंत्री जी लाल किले से बोल रहे हैं कि जम्मू कश्मीर में शांति है। विपक्षी पार्टी के नेताओं की कश्मीर  में इंट्री बंद कर दी है, जम्मू कश्मीर के नेताओं को नजरबंद कर दिया है,छोटे नेताओं को आगरा की जेल में बंद कर रखा है। एक  करोड़ वाले जम्मू  कश्मीर पर 10 लाख से ज्यादा फौजियों को तैनात करके जनता को घरों में कैद करके शासन किया जा रहा है। क्या इसी को आजादी कहते हैं?
प्रधान सेवक महोदय ने लाल किले से तीन तलाक बिल पास करने के लिए अपने पीठ थपथपाई। इस बिल का मुस्लिम समाज कितने बड़े स्तर पर विरोध कर रहा है यह क्यों नहीं बताया?और हिंदू समाज की महिलाओं को तलाक लेने के लिए अपनी जिंदगी के कीमती 20 वर्ष तक कोर्ट के चक्कर काटने में गुजारने पड़ते हैं उनका दर्द मोदी जी को क्यों  नहीं दिखाई दिया? क्या इसी को आजादी  कहते हैं?


मंदिर, मस्जिद, निर्माण, तलाक ,गौरक्षा, लव, जिहाद, घर वापसी, तथा कौन क्या खाएगा।क्या यह सब सरकार  के करने के काम है? जनता पर फैसले थोपे  जा रहे हैं। नोटबंदी  का जनता को क्या लाभ पहुंचा अभी तक मालूम नहीं हो सका। बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई सरहदों पर बढ़ती सहादत की संख्या, कालाधन, सरकार के सहयोगी उद्योगपतियों का बैंकों का कर्जा लेकर विदेश भाग जाना , बढ़ता आतंकवाद ,बढ़ते अपराध, जनता के अधिकारों के हक पर सरकार बात क्यों नहीं करती? क्या इसी को आजादी करते हैं?
आपसी सौहार्द को जितना नुकसान पिछले 5 वर्षों में पहुंचा है उतना पहले कभी नहीं पहुंचा। मोदी सरकार के विधायक, सांसद हिंदू मुस्लिम की बात करके जनता के बीच नफ़रत की खाई सिर्फ इसलिए पैदा कर रहे हैं ताकि जनता का ध्यान सरकार की विफलता की ओर न जाए और वह जनता की धार्मिक भावना व देश भक्ति के साथ खिलवाड़ करके वोट बटोरकर शासन करते रहें कितनी बड़ी विडंबना है कि 100 करोड़ से अधिक आबादी  को मात्र 20 करोड़ की आबादी से डराया जा रहा है।और जनता इस घिनौनी राजनीति को समझने की बजाय  इनकी प्लानिंग का शिकार हो रही है।

गरीब आज भी अमीरों का मोहताज है अर्थात गुलाम है । कर्मचारी अधिकारी का गुलाम है। यहां तक कि न्यायालय भी सत्ता से प्रभावित है। क्या इसी को अजादी करते हैं ? मनचाहा टैक्स सरकार जनता से वसूल रही है, जनता की मेहनत की कमाई को फिजूल के प्रचार और विदेश यात्रा पर खर्च किया जा रहा है। कोई अगर सवाल पूछे तो देशद्रोही है। यह कैसी आजादी है? ये आजादी अधूरी है?