जहरीला ज्ञान बना रहा है समाज को मनोरोगी
September 7, 2019 • sona

देश की राजधानी दिल्ली की हमारे सामने दो ख़बरें हैं। ये ख़बरें बता रही हैं कि भारतीय समाज में अब लिंचिंग करके किसी इंसान की जान लेना मानो आम बात हो गई है। पहली ख़बर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन की है जहां यूपी के शामली जिले के गढ़ी दौलत गांव के रहने वाले क़ारी ओवैस को प्लेटफार्म पर मोबाइल एसिसिरीज बेचने वाले ने मामूली से विवाद में अपने साथियो के साथ मिलकर पीट पीट कर मार दिया।

दूसरी ख़बर दिल्ली के मौजपुर गांव की है जहां साहिल सिंह नाम के एक शख्स को स्कूटी टकराने के मामूली से विवाद के कारण पीट पीट कर मार दिया गया। क़ारी ओवैस की जान लेने वाले उसी के सहधर्मी हैं तो साहिल सिंह की जान लेने वाले भी उसी के सहधर्मी हैं। लिंचिंग की इन घटनाओं के लिये सिर्फ नफरत के सौदागर ही जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि अदालतों से इंसाफ में होने वाली लेटलतीफी और सिनेमा में ऑन द स्पॉट 'न्याय' करने वाले का जय जयकारा करती भीड़, तथा न्यूज़ स्टूडियो में लिंचिंग को जस्टिफाई करने वाले तथाकथित एंकर्स ने भारतीय समाज को लिंचिंग नुमा बीमारी लगा दी है। अब हर कोई फैसला ऑन द स्पॉट चाहता है।

दुकानदार द्वारा ग्राहक से पैसे मांगने का मामूली सा विवाद मॉबलिंचिंग करा दे रहा है, स्कूटी लड़ जाने, रास्ता न देने को लेकर मॉबलिंचिंग हो रही है, दुकानदार और ग्राहक के बीच कहासुनी मॉबलिंचिंग की घटना में तब्दील हो रही है। इसके अलावा बच्चा चोरी और गाय के नाम पर लिंचिंग हो जाना तो अब आम बात लगने लगा है। भारतीय समाज हिंसक, और उग्र बनता जा रहा है। उसे नफरत का इंजेक्शन, न्यूज़ चैनल के स्टूडियो, सिनेमा की हिंसक मूवी, और वाट्सप यूनीवर्सिटी से मिलता है। और उसके बाद वह अपने 'शिकार' की तलाश में रहता है और आखिरकार वह किसी साहिल सिंह अथवा क़ारी ओवैस की मामूली सी बात पर भी जान ले लेता है। अगर यह सब यूं ही चलता रहा तो भारतीय समाज में मनोरोगियों की एक बहुत बड़ी संख्या पैदा हो जाएगी। वाट्सप यूनीवर्सिटी से मिलने वाला ज़हरीला 'ज्ञान' इस समाज को मनोरोगी बना रहा है।
Wasim Akram Tyagi✍